Science: ऐसा पदार्थ जिसे मात्र 1 ग्राम बनाने में 10 करोड़ साल लग जाएंगे - जानिए क्या है - loan Solo Real

Science: ऐसा पदार्थ जिसे मात्र 1 ग्राम बनाने में 10 करोड़ साल लग जाएंगे – जानिए क्या है

ब्रह्मांड (Universe) की हर चीज, जिसे हम देखते और महसूस करते है वो पदार्थ (Matter) कहलाती है। यही वैज्ञानिक दृष्टिकोण (Scientific Approach) से हम यदि बात करे तो एटम (Atom) अर्थात परमाणुओं से ही मिलकर किसी भी पदार्थ का निर्माण होता है। 

अब परमाणु भी तो किसी न किसी अवयव (Components) से मिलकर बनते ही होंगे ? तो चलिए विज्ञान (Science) की कुछ बुनियादी (Basic) बातों पर नजर डालते है।

ब्रह्मांड के हर पदार्थ में तीन प्रकार के प्राथमिक कण (Elementary Particles) मौजूद होते है। इलेक्ट्रॉन (Electron), प्रोटॉन (Proton) और न्यूट्रॉन (Neutron)। इन तीनो कणों के अपने अपने आवेश (Charge) होते है।

जहाँ इलेक्ट्रान में ऋणात्मक आवेश (Negative Charge) होता है तो प्रोटॉन में धनात्मक आवेश (Positive Charge) होता है। वहीं न्यूट्रॉन बिना किसी आवेश के उदासीन अवस्था (Neutral Condition) में रहता है।

तो चलिए इन बेसिक जानकारियों को बतलाने के बाद आपको एक हैरान कर देने वाली जानकारी देता हूँ।

एंटीमैटर (Antimatter)

आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि सभी पदार्थो से परे भी इस ब्रह्मांड में एक ऐसा पदार्थ है जो मौजूद इन पदार्थो के बिल्कुल विपरीत अवस्था में होता है। यह पदार्थ मौजूदा परमाणु की शक्तियों से अनगिनत गुना शक्तिशाली होता है।

इतना शक्तिशाली की यदि मात्र इसे एक ग्राम बना लिया जाए तो वह 48 किलोटन टीएनटी की ऊर्जा से विस्फोट कर सकता है। मतलब हिरोशिमा और नागासाकी में गिराए गए परमाणु बम से भी दो गुना ज्यादा शक्तिशाली।

वैज्ञानिकों ने विपरीत अवस्था वाले इस पदार्थ पदार्थ को एंटीमैटर (Antimatter) का नाम दिया है।

ब्रह्मांड में पदार्थो के समान ही भरपूर मात्रा में मौजूद है एंटीमैटर।

एंटीमैटर भी पदार्थ के ही समान इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन और न्यूट्रॉन से ही मिलकर बनता है। चूंकि एंटीमैटर की अवस्था पूरी तरह विपरीत होती है इस वजह से उनमें कणों का आवेश भी विपरीत ही होता है।

मतलब इलेक्ट्रॉन में पॉजिटिव चार्ज तो प्रोटॉन में निगेटिव चार्ज रहता है। इसी वजह से इन्हें एंटीपार्टिकल्स (Antiparticles) कहते है।

बिग बैंग थ्योरी में रहस्यमयी एंटीमैटर।

13.7 अरब वर्ष पहले एक बहुत ही विशालकाय धमाका ब्रह्मांड में हुआ था। इस दौरान अनगिनत मात्रा में ऊर्जा (Energy) का संचार हुआ जिससे इस ब्रह्मांड और सौरमण्डल (Solar System) की उत्पत्ति हुई।
यह धमाका ही बिग बैंग (Big – Bang) के नाम से चर्चित है। वैज्ञानिक एडविन हबल के अनुसार मात्र बिग बैंग में ऊर्जा इतनी असंख्य मात्रा में निकली कि मात्र 3 मिनट में ही परमाणु का निर्माण हो गया। आकाश गंगा, तारे, ग्रह, ग्रहिकाऐं, प्रावार, भू-पर्पटी, क्रोड ये सब इस बिग बैंग धमाके की वजह से ही निर्मित हुए थे।

इसी बिग बैंग धमाके में पदार्थो का साथ एंटीमैटर की भी समान मात्रा में उत्पत्ति हुई थी परन्तु वैज्ञानिकों के नजरिये में सिर्फ पदार्थो को ही देखा जा सका है जबकि एंटीमैटर का रहस्य आज तक बना हुआ है।

कुछ इस तरह बनता है एंटीमैटर

युरोपियन परमाणु संस्थान (Nuclear Organisation) CERN के मुताबिक एंटीमैटर तभी बनता है जब पार्टिकल्स को किसी उच्च ऊर्जा (Collider) में बार-बार टकराया जाता है जिससे उसके विपरीत प्रकृति (Nature) वाले एंटीपार्टिकल्स बनते हैं जिन्हें इक्टठा करने के बाद ऐंटीमैटर को बनाया जाता है।

इस तरह से सर्न (CERN) एक वर्ष में केवल 10 नैनोग्राम (Nanogram) एंटीमैटर ही बना पाता है जो बॉम्ब बनाने के हिसाब से बहुत ही कम है। सर्न द्वारा बनाया गया 10 नेनोग्राम एंटीमैटर, एक ग्राम का 10 करोड़वां हिस्सा है।
अर्थात अगर 1 ग्राम एंटीमैटर यदि सर्न बनाना चाहे तो उसे 10 करोड़ साल लग जायेंगे।

यह एंटीमैटर इतनी खतरनाक चीज है कि मात्र एक किलोग्राम एंटीमैटर से यदि कोई बॉम्ब बनाता है तो उसके विस्फोट की ताकत, आज तक के बनाए गए सभी 15 हजार परमाणु हथियारों की ताकत से भी कई गुना ज्यादा होगी।

मतलब वह समूचे ब्रह्मांड का विनाश कर सकता है।
इतना महंगा खर्च है एंटीमैटर बनाने में।

1 ग्राम का दश करोड़वां हिस्सा अर्थात 10 नैनोग्राम एंटीमैटर बनाने के लिए सर्न का 1.5 करोड़ डॉलर खर्च होता है। यदि भारतीय मुद्रा में बात करे तो लगभग 105 करोड़ रुपये मात्र 1 ग्राम के दश करोड़वें हिस्से भर की मात्रा में बनाने का खर्च आता है। अब आप स्वयं अंदाजा लगा लीजिए कि पूरे 1 ग्राम एंटीमैटर बनाने में कितना खर्च आ जाएगा।

दूसरी सबसे बड़ी बात यह है कि अगर आप इसे बनाते हैं तो आपको हद से ज्यादा ऊर्जा की आवश्यकता पड़ने वाली है।अगर हम 1 ग्राम ऐटीमैंटर को एक दिन में बनाने की कोशिश करें तो हमें इसके लिए 2000 मेगावाट का बहुत ही विशाल पावर प्लांट लगाना होगा जिससे हम ऐंटीमैटर को हर रोज 1 ग्राम के दर पर बना सकते हैं। पर ये जो आप 2000 मेगावाट बिजली देख रहे हैं वो इतनी ज्यादा है कि इससे आप पूरे दिन 20 लाख घरों को रोशन करके रख सकते हो। वैज्ञानिकों के अनुसार यही एकमात्र तरीका है जिससे वह काफी मात्रा में और कम समय में पर्याप्त एंटीमैटर बना सकते हैं।

लेखक एवं विश्लेषक :- हर्षितेश्वर मणि तिवारी

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